लोकहित और सामाजिक संवेदना को उजागर करता है साहित्यः घनश्याम नाथ कच्छावा
02 Mar 2023
प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन के सहयोग से आईटीसी राजपुताना मे आखर में युवाओं द्वारा लिखी गई राजस्थानी भाषा की पुस्तकों का लोकार्पण और उनकी साहित्यिक समीक्षा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें हाड़ौती अंचल से 3 सद्य प्रकासित किताबें शामिल की गयी। कार्यक्रम में राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, गोपाल कृष्ण व्यास मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। राजस्थानी भाषा एवं साहित्य अकादमी के सदस्य, घनश्याम नाथ कच्छावा ने इस अवसर पर वक्तव्य दिया। कोटा से डॉ. नंदकिशोर महावर और जयपुर से मीनाक्षी पारीक ने इन पुस्तकों की साहित्यिक चर्चा में भाग लिया। राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, गोपाल कृष्ण व्यास ने राजस्थानी भाषा और साहित्य को
अधिक से अधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर जोर दिया। राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के सदस्य, कवि-समीक्षक घनश्याम नाथ कचप्रवा ने विजय जोशी की पुस्तक राजस्थानी
गद्य विविधा 'भावों की रमझोळ' पर कहा कि इस पुस्तक में कयेत्तर साहित्य की विविध विधाओं आलेख, शोध-समीक्षा, बाल-कथा, डायरी, रिपोर्ट, रेखाचित्र, संस्मरण आदि रचनाओं का समावेश किया गया है। इन रचनाओं की यह विशेषता है कि में लोकहित और सामाजिक संवेदना को उजागर करते हुए सामाजिक संस्कार तथा जीवन मूल्यों को संवर्द्धित करती हैं।